एक पहल फाउंडेशन द्वारा सूर्यकुण्ड परिसर को स्वच्छ एवं हरा भरा करने का बीड़ा उठाया गया है।
जिसके लिए सूर्यकुण्ड पर एक अभियान 2017 में दिसम्बर में प्रारम्भ किया गया ।
इसके अंतर्गत परिसर की सफाई , वृक्षारोपण एवं रँगाई - पुताई का कार्य किया जा रहा है।
आइये जानते है सूर्य कुण्ड के बारे में -
फैजाबाद अकबरपुर मार्ग पर दर्शन नगर में स्थित है यह धर्मिक एवं एतिहासिक सरोवर सूर्य कुण्ड ।
यहाँ पर प्रतिवर्ष भादों माष के महारविवार के दिन मेले का आयोजन किया जाता है।
पौराणिक इतिहास -
श्रीरामचरितमानस में लिखित उल्लेख के अनुसार ऐसा कहा जाता है जब भगवान राम लला का प्राकट्योत्सव हुआ था उस समय अयोध्या में 33 करोड़ देवता आए थे और इन सभी का मार्ग प्रशस्त करते हुए भगवान सूर्य सबसे आगे प्रकाश फैलाते हुए चल रहे थे और उस समय 30 दिनों तक अयोध्या में अंधेरा नहीं हुआ और प्रकाश फैला रहा । 30 दिनों तक अयोध्या में रात्रि नहीं हुई और सभी देवी देवता भगवान श्री राम के प्राकट्य उत्सव में शामिल रहे ।
जिस स्थान पर भगवान सूर्य का रथ रुका उसी स्थान पर आज सूर्यकुण्ड स्थापित है।
अयोध्या के दर्शन नगर कस्बे में स्थित प्राचीन सूर्य कुंड मंदिर के पुजारी महान धनुषधारी महाराज बताते हैं कि त्रेता युग में 30 दिनों तक भगवान सूर्य का रथ जिस स्थान पर रुका रहा उसी स्थान पर राजा दर्शन सिंह ने प्राचीन सूर्य कुंड मंदिर का और सरोवर का निर्माण कराया था जहां प्रतिवर्ष सूर्य जयंती के अवसर पर महारविवार को विशाल मेले का आयोजन किया जाता है ।
कुण्ड के निर्माण की कहानी -
किंवदंतियों के अनुसार अयोध्या के राजा दर्शन सिंह शिकार के लिए इस क्षेत्र में आए थे जहां उन्हें प्यास लगने पर उनके एक सेवक ने गड्ढे के रुप में मौजूद इस कुंड से थोड़ा सा जल लाकर राजा को दिया जिसे पीते ही राजा का चर्म रोग ठीक हो गया ।
जिसके बाद राजा ने इस स्थान पर 7 दिनों तक तपस्या की । राजा की तपस्या से प्रसन्न होकर आकाशवाणी हुई और राजा ने आकाशवाणी में कही हुई बात के अनुसार इस कुंड की खुदाई कराई जिसके बाद इस कुंड के अंदर से 12 अश्वों पर सवार भगवान सूर्य की प्रतिमा,भगवान शिव का शिवलिंग और ढेर सारा खजाना प्राप्त हुआ जिसके बाद उसी खजाने से इस प्राचीन मंदिर और सरोवर का निर्माण कराया गया ।
Source.. पत्रिका